🏆 संघर्ष से शिखर तक: करेरा के शिवम केवट बने नेशनल MMA गोल्ड मेडलिस्ट
करेरा। झंडा गांव के निवासी शिवम केवट (पुत्र– केशव केवट) ने तीन साल बाद रिंग में ऐसी दमदार वापसी की है, जिसने पूरे क्षेत्र को गर्व से भर दिया। असम के गुवाहाटी में आयोजित नेशनल MMA चैंपियनशिप (नेशनल केज कॉम्बैट–33) में शिवम ने नगालैंड के प्रतिद्वंदी प्रियम कलिता को तीसरे राउंड में परास्त कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया और करेरा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर दिया।
शिवम ने करीब पांच वर्ष पूर्व कोच बलवीर रावत की अकादमी वीरा फाइट क्लब से MMA की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने कई मुकाबले जीते और स्टेट किक बॉक्सिंग प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल भी हासिल किया। प्रतिभा, अनुशासन और जज्बे ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया, लेकिन जीवन ने अचानक कठिन मोड़ ले लिया।
ग्रेजुएशन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। पिता पहले से अस्थमा से पीड़ित थे, घर की जिम्मेदारियां बढ़ गईं और छोटे भाई को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी। शिवम का सपना दिल्ली जाकर UPSC की तैयारी करने का था, मगर हालातों ने पढ़ाई और खेल—दोनों पर विराम लगा दिया।
🔥 असली लड़ाई रिंग के बाहर थी
हिम्मत हारने के बजाय शिवम ने संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लिया। अपने मित्र सुदामा सेन के साथ खेतों में सेल्फ-प्रैक्टिस शुरू की। परिवार को संभालने के लिए खेत के पास एक छोटी दुकान खोली और देसी मुर्गा फार्म शुरू किया। तीन साल तक जिम्मेदारियों और मेहनत का यह दौर चलता रहा, लेकिन भीतर का खिलाड़ी जिंदा रहा।
इसी बीच धीरज रावत और करेरा विधायक रमेश प्रसाद खटीक के सहयोग और आशीर्वाद से शिवम को दोबारा अपने सपनों को उड़ान देने का अवसर मिला। उन्होंने बिना देर किए अपना फार्म और दुकान बंद की और गुवाहाटी जाकर देश की शीर्ष MMA अकादमी में कड़ी ट्रेनिंग शुरू की।
सिर्फ एक महीने की कठिन साधना के बाद शिवम ने नेशनल केज कॉम्बैट–33 चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
🌟 युवाओं के लिए प्रेरणा
शिवम की यह जीत केवल एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि करेरा के हर उस युवा के सपनों की जीत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य देखता है। उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।
आज शिवम केवट पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि उन्हें निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहा, तो वे एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश और करेरा का नाम रोशन करेंगे।
💪 “संघर्ष जितना बड़ा होगा, जीत उतनी शानदार होगी।”
करेरा का बेटा अब रुकने वाला नहीं… 🔥
उप संपादक: राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता
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