कुण्डलपुर की महिमा के साथ संपन्न हुआ रुक्मिणी विवाह उत्सव, श्रद्धालु भक्ति रस में हुए सराबोर
खोड़ (शिवपुरी)। ग्राम खोड़ स्थित प्राचीन काली माता मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह उत्सव का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ किया गया। विवाह प्रसंग के दौरान पूरा पांडाल “जय श्रीकृष्ण” और “राधे-राधे” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा तथा श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।
कथा व्यास महाराज ने संगीतमय भजनों एवं मधुर कथा वाचन के माध्यम से रुक्मिणी हरण और विवाह प्रसंग का जीवंत वर्णन किया। उन्होंने कुण्डलपुर (वीरा) क्षेत्र की धार्मिक महिमा का उल्लेख करते हुए बताया कि लोक-मान्यताओं के अनुसार यह वही पावन भूमि है, जहां द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण माता रुक्मिणी को अपने साथ लेकर गए थे। यद्यपि इसके ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी क्षेत्रवासियों की आस्था में इस स्थान का विशेष महत्व बना हुआ है।
कथा के दौरान महाराज श्री ने बताया कि राजा भीष्मक की पुत्री माता रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानती थीं। जब उनके भाई रुक्मी ने इस संबंध का विरोध किया, तब माता रुक्मिणी ने भगवान को संदेश भेजकर सहायता की प्रार्थना की। भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण उनकी पुकार सुनकर पहुंचे और माता रुक्मिणी का हरण कर उन्हें अपने साथ ले गए। इसके बाद दोनों का दिव्य विवाह संपन्न हुआ।
महाराज श्री ने कहा कि रुक्मिणी हरण का प्रसंग भक्त और भगवान के अटूट संबंध का प्रतीक है। यह संदेश देता है कि जो भक्त सच्चे मन से प्रभु की शरण में जाता है, उसकी रक्षा के लिए भगवान स्वयं उपस्थित होते हैं।
विवाह उत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया और भगवान श्रीकृष्ण तथा माता रुक्मिणी के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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