करैरा जनपद की गोशालाओं में बदहाली, निरीक्षण में मिलीं गंभीर अनियमितताएं
गोवंश भूख-प्यास से बेहाल, संचालकों और जिम्मेदारों पर राशि गबन के आरोप
लाला परिहार, आमोलपठा।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण और गौशालाओं के संचालन के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ताकि बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय, चारा और उपचार मिल सके। लेकिन शिवपुरी जिले की करैरा जनपद पंचायत क्षेत्र की कई गौशालाओं की स्थिति सरकार की योजनाओं की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां गोवंश भूख, प्यास और बीमारी से तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी और संचालक मौन बने हुए हैं।
विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल की टीम ने मीडिया के साथ मिलकर करैरा जनपद क्षेत्र की कई गौशालाओं का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत आमोलपठा, पारागढ़, राजगढ़, उकायला, उड़बाहा, थरखेड़ा और सोन्हर की गौशालाओं में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई स्थानों पर गौशालाएं कागजों में संचालित होती मिलीं, जबकि मौके पर या तो बहुत कम गोवंश मौजूद थे या गौशालाएं सूनी पड़ी थीं।
निरीक्षण के दौरान कई गौशालाओं में लगभग 40 के आसपास गोवंश मिले, जबकि रिकॉर्ड में संख्या कहीं अधिक बताई जा रही है। टीम का आरोप है कि संचालक अपने निजी पशुओं को गौशाला में बांधकर सरकारी राशि का लाभ उठा रहे हैं और 100 से 150 गोवंशों के नाम पर मिलने वाली राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
गौशालाओं में न तो पर्याप्त चारे की व्यवस्था मिली और न ही पशुओं के उपचार के लिए कोई चिकित्सकीय सुविधा दिखाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि पशु चिकित्सक समय पर उपलब्ध नहीं होते। फोन लगाने पर बहाने बनाकर आने से बचते हैं और इलाज में देरी के कारण कई पशुओं की मौत हो जाती है। मजबूरी में ग्रामीण झोलाछाप डॉक्टरों से महंगे दामों पर इलाज कराने को विवश हैं।
आमोलपठा में पशु चिकित्सालय भवन पिछले सात वर्षों से बंद पड़ा हुआ है और उस पर ताला लटका है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भवन केवल शोपीस बनकर रह गया है। वहीं आवारा पशु रात के समय सड़कों पर घूमते नजर आते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वे करैरा सीईओ से लेकर एसडीएम तक कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि कुछ कर्मचारी हिस्सा लेकर कार्रवाई से बच रहे हैं।
गौशालाओं की बदहाल तस्वीरें और गोवंशों की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इन आरोपों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर गोवंश यूं ही बदहाली का शिकार होते रहेंगे।

