डिजिटल साक्षरता से गांव बनेंगे आत्मनिर्भर व समृद्ध – डॉ. हरिशंकर कंसानाकरेरा।शासकीय स्नातक महाविद्यालय करैरा की राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाई के सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिवस पर गोद ग्राम श्योपुरा में बौद्धिक सत्र एवं संवाद परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ, जीवाजी विश्वविद्यालय के समन्वयक डॉ. हरिशंकर कंसाना रहे।अपने उद्बोधन में डॉ. कंसाना ने कहा कि गांवों को आत्मनिर्भर एवं संपन्न बनाने के लिए डिजिटल साक्षरता अत्यंत आवश्यक है। आज सूचना क्रांति के युग में तकनीक के माध्यम से गांवों को वैश्विक स्तर से जोड़ा जा सकता है। आधुनिक तकनीकों के सही उपयोग से गांव में ही लघु उद्योग, रोजगार केंद्र और स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे डिजिटल जागरूकता को अपनी प्राथमिकता बनाएं और गांवों में तकनीकी ज्ञान का प्रसार करें। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सेवा व्यक्तित्व विकास का एक सशक्त माध्यम है और गांवों के विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना साकार हो सकती है।कार्यक्रम के अंत में गोद ग्राम में चल रहे परियोजना कार्यों को लेकर अनुभव कथन प्रस्तुत किए गए। स्वयंसेवकों ने आदर्श ग्राम से जुड़ी समस्याओं एवं उनके संभावित समाधान पर अपने विचार साझा किए।इस अवसर पर रासेयो इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार कोली, सहायक प्राध्यापक प्रियंका तिवारी, अतिथि विद्वान रामकृष्ण गौतम सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित रहे
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