स्वयं वाहन चलाकर एसडीएम चालक को लेकर पहुंचे उसके घर
करैरा:- करैरा में एसडीएम अनुराग निंगवाल ने अपने वाहन चालक देवी सिंह यादव की रिटायरमेंट को एक यादगार और भावुक पल में तब्दील कर दिया, जो पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया। देवी सिंह यादव ने लगभग 42 वर्षों तक ईमानदारी और समर्पण से एसडीएम के वाहन चलाए। इस दौरान उन्होंने एक दर्जन से अधिक एसडीएम के साथ काम किया और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। हर अधिकारी उनके कार्यकुशलता और विश्वसनीयता से प्रभावित रहा। रिटायरमेंट के दिन एसडीएम ने पहले देवी सिंह को अपने बगल में बिठाया, फिर तहसीलदार कल्पना शर्मा को साथ बैठाकर सभी पटवारियों, कर्मचारियों और अधिकारियों से उन्हें सम्मानित करवाया। लेकिन सबसे दिल छू लेने वाला क्षण तब आया जब एसडीएम ने खुद उसी सरकारी वाहन की ड्राइविंग सीट संभाली, जिसमें देवी सिंह सालों तक सवार होते थे। उन्होंने चालक को आफिसर वाली सीट पर बैठाया, जिससे देवी सिंह भावुक हो उठे। एसडीएम ने खुद वाहन चलाकर उन्हें उनके घर तक पहुंचाया और वहां परिवार के साथ विदाई ली। इस नजारे ने न केवल तहसील परिसर बल्कि पूरे मोहल्ले को भावुक कर दिया। देवी सिंह के परिवार के सदस्यों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने देखा कि साहब खुद ड्राइवर बनकर उनके घर पहुंचे। यह घटना सरकारी सेवा में पद के अंतर से ऊपर उठकर मानवीय संवेदनाओं का बेहतरीन उदाहरण बनी। शहर के लोग इसे एक अनूठी पहल मानकर सराह रहे हैं, जो बताती है कि सच्ची नेतृत्व क्षमता सम्मान और करुणा से ही जन्म लेती है। एसडीएम अनुराग निंगवाल का यह कदम न केवल देवी सिंह के लिए सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि सभी कर्मचारियों के लिए प्रेरणा स्रोत भी साबित हुआ। ऐसे कार्य ही प्रशासन और जनता के बीच का विश्वास मजबूत करते हैं।
मानवीय संवेदना का अनुपम उदाहरण: एसडीएम ने खुद चलाई गाड़ी, चालक को घर पहुंचाया
देवी सिंह यादव की 42 वर्षों की लंबी सेवा को एसडीएम अनुराग निंगवाल ने एक ऐसे अंदाज में सम्मानित किया, जो दुर्लभ है। जहां आमतौर पर रिटायरमेंट पर औपचारिक बधाई और उपहार दिए जाते हैं, वहीं यहां अधिकारी ने पद की गरिमा को दरकिनार कर इंसानियत को प्राथमिकता दी। एसडीएम ने पहले तहसील के सभी कर्मचारियों से चालक को सम्मानित करवाया, फिर खुद वाहन की कमान संभाली। उन्होंने देवी सिंह को पीछे की बजाय अगली सीट पर बैठाया, ताकि वह महसूस करें कि आज उनकी बारी है। इस दौरान देवी सिंह की आंखों में खुशी के आंसू थे, जो सालों की मेहनत और विश्वास का प्रमाण बने। घर पहुंचते ही परिवार ने एसडीएम को देखकर भावुक होकर स्वागत किया। पूरे इलाके में यह खबर फैल गई और लोग इसकी तारीफ करते नहीं थक रहे। यह घटना साबित करती है कि सत्ता और पद से बड़ा इंसानी रिश्ता होता है। एसडीएम का यह व्यवहार न केवल एक व्यक्ति को सम्मान देता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए संदेश देता है कि कर्मचारी भी परिवार का हिस्सा हैं। ऐसे छोटे-छोटे कदम बड़े बदलाव लाते हैं और समाज में सकारात्मकता फैलाते हैं। देवी सिंह यादव की सेवा को याद करते हुए लोग कह रहे हैं कि ईमानदारी और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। एसडीएम अनुराग निंगवाल की इस पहल ने करैरा को एक नई पहचान दी, जहां अधिकारी और कर्मचारी के बीच का रिश्ता सिर्फ काम तक सीमित नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
पत्रकार राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता
मो:-8435495303




