यूजीसी आंदोलन में करैरा पुलिस की सूझबूझ और संयम बना मिसाल
टी.आई. विनोद छावई के नेतृत्व में शांतिपूर्ण व अनुशासित रहा आंदोलन
करैरा।
करैरा में यूजीसी से जुड़े मुद्दों को लेकर सवर्ण समाज द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन पूर्णतः शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप संपन्न हुआ। इस दौरान सामाजिक सौहार्द, कानून-व्यवस्था और जनशांति बनाए रखने में करैरा पुलिस की भूमिका सराहनीय रही।
विशेष रूप से करैरा थाना प्रभारी विनोद छावई ने अपनी सूझबूझ, सजगता और नेतृत्व क्षमता का उत्कृष्ट परिचय देते हुए पूरे आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराया। उनकी अगुवाई में पुलिस बल ने निष्पक्षता, सतर्कता और संवादात्मक रवैये के साथ स्थिति को नियंत्रित रखा, जिससे किसी भी प्रकार का तनाव, टकराव या अव्यवस्था उत्पन्न नहीं हुई।
आंदोलन के दौरान पुलिस की सक्रिय मौजूदगी और संवेदनशील कार्यशैली के कारण क्षेत्र में जातीय या धार्मिक सौहार्द पूरी तरह सुरक्षित रहा। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जो प्रशासनिक दक्षता और परिपक्वता का स्पष्ट उदाहरण है।
आज के संवेदनशील सामाजिक परिवेश में इस तरह किसी बड़े आंदोलन को शांतिपूर्ण एवं मर्यादित ढंग से सम्पन्न कराना करैरा पुलिस की कार्यकुशलता और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाता है। करैरा पुलिस ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि प्रशासन सजग, निष्पक्ष और जिम्मेदार हो, तो हर परिस्थिति में शांति और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा संभव है।
क्षेत्रवासियों ने टी.आई. विनोद छावई एवं उनकी पूरी पुलिस टीम के इस प्रशंसनीय कार्य की मुक्तकंठ से सराहना की है और ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों पर गर्व व्यक्त किया है। यह कार्य न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज और प्रशासन दोनों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
उप संपादक राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता

