करैरा अनुविभाग में राजस्व न्यायालयों की अनियमितताओं के खिलाफ वकीलों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापनकरैरा:- करैरा में व्याप्त राजस्व न्यायालयों की विभिन्न समस्याओं और अनियमितताओं से निपटने के उद्देश्य से स्थानीय वकीलों ने एसडीएम अनुराग निंगवाल को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में सात प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया है, जो आम जनता को लगातार परेशान कर रहे हैं। एडवोकेट अनिल कुमार दुबे, प्रशांत त्रिपाठी, समर्थ गुप्ता, प्रशांत तिवारी, कल्याण सिंह लोधी, राजीव गरुड़, उत्तम लोधी जैसे युवा वकीलों के साथ वरिष्ठ अभिभाषक श्री रघुवर दयाल मिश्रा, पदम जाटव, बलराम यादव, राममिलन लोधी, सुदीप गौतम, विजय सक्सेना, जितेंद्र परिहार और अन्य अधिवक्ता इस मुद्दे पर एकजुट होकर उपस्थित हुए। ज्ञापन में मांग की गई है कि पीठासीन अधिकारियों को निर्देश जारी कर प्रकरणों में नियमित तारीखें तय की जाएं और आदेशित कार्यवाहियां निर्धारित समयसीमा में पूरी हों, ताकि पक्षकारों को अनावश्यक चक्कर न काटने पड़ें। इसके अलावा, निराकृत प्रकरणों को बिना निष्पादन कार्यवाही पूरे किए दाखिल रिकॉर्ड करने की प्रथा पर रोक लगाने की अपील की गई है, जिससे नागरिकों को अभिलेखों में बदलाव कराने में कठिनाई न हो। वकीलों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुए, तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।त्रुटि सुधार प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी पर सख्त निर्देशों की मांगत्रुटि सुधार से जुड़े प्रकरणों (धारा 115 एवं 75, मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां तहसीलदार द्वारा एसडीओ को प्रतिवेदन भेजने के नाम पर मूल प्रकरण पत्र राजस्व निरीक्षक और पटवारी को सौंप दिए जाते हैं। ये अधिकारी इन्हें घर ले जाकर रख लेते हैं, जिसके फलस्वरूप पक्षकारों को उनके घरों पर जाकर चक्कर लगाने पड़ते हैं और अवैध वसूली का शिकार बनना पड़ता है। वकीलों ने मांग की है कि यदि रिपोर्ट के लिए पटवारी या निरीक्षक की जरूरत हो, तो तहसीलदार उन्हें कार्यालय में तलब करें और समयबद्ध तरीके से प्रतिवेदन तैयार कर एसडीओ को भेजा जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे। इसी क्रम में, कोरोना काल में पटवारियों को वितरित ग्रामों के अधिकार अभिलेखों को अभी तक तहसील की रिकॉर्ड शाखा में वापस जमा न करने की शिकायत भी दर्ज की गई है। इन अभिलेखों को अवैध वसूली का साधन बना लिया गया है, जहां नकल की प्रति के नाम पर 100 से 200 रुपये तक वसूले जाते हैं और कुछ मामलों में 10-10 हजार रुपये तक की मांग की जाती है। इससे न केवल न्यायिक प्रकरण विलंबित हो रहे हैं, बल्कि किसानों को भी भारी परेशानी हो रही है। वकीलों ने एसडीएम से अनुरोध किया कि सभी अधिकार अभिलेख तुरंत तहसील में जमा कराए जाएं।डिजिटलीकरण की कमी और लोक सेवा केंद्र की लापरवाही से जनता परेशान, मतदाता पुनरीक्षण का दुरुपयोग बंद होज्ञापन में माँग की गई है कि करैरा डिजिटल पिछड़ापन में प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है, जहां शिवपुरी जिले के अन्य अनुविभागों के हस्तलिखित राजस्व अभिलेख (खसरा, खतौनी, भूलेख) ऑनलाइन वेबसाइट पर अपलोड हो चुके हैं, लेकिन करैरा के ग्रामों के रिकॉर्ड अभी भी ऑफलाइन हैं। इससे नागरिकों को दस्तावेज प्राप्त करने में भारी असुविधा हो रही है और तहसील के चक्कर बढ़ गए हैं। वकीलों ने तत्काल अपलोडिंग की कार्रवाई की मांग उठाई है। इसके साथ ही, लोक सेवा केंद्र करैरा में कर्मचारियों की लापरवाही पर भी निशाना साधा गया, जहां आवेदन पत्रों को शीघ्र दर्ज न करने और रसीद न देने की शिकायतें आम हैं। शासन की ‘समाधान’ योजना के तहत एक दिवसीय नकल सेवा (हेड 0717) का लाभ न देकर पक्षकारों को गुमराह किया जाता है और साधारण हेड (0718) के बहाने तहसील भेजा जाता है, जहां आगे परेशानी होती है। अंत में, चल रहे मतदाता पुनरीक्षण अभियान का दुरुपयोग उजागर किया गया, जहां अन्य अनुविभागों में निरीक्षण तीन घंटों में पूरा कर सामान्य कार्य चालू रहते हैं, लेकिन करैरा में अधिकारियों द्वारा इस बहाने न्यायिक सुनवाई पूरी तरह बंद कर दी जाती है। वकीलों ने पीठासीन अधिकारियों को निर्देश देने की अपील की कि निर्धारित समय में पुनरीक्षण पूरा कर अन्य कार्य सुचारू रखें, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
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